शुक्रवार, 27 जनवरी 2012

किसको मिलेगा ताज???


उत्तर प्रदेश की सियासी गलियों में अब भी उलट फेर ख़त्म होता नहीं दिख रहा है ...वैसे भी पार्टी छोड़ना ओर बागी होना इन सफेदपोशो की बड़ी पुरानी आदत सी है जब जब चुनावो का एलान हो जाता है तब से ये नेताओ का भी भाव बढ़ जाता है..ओर फिर ज्यादातर या तो अपने पार्टी के खिलाफ ही बागी तेवर अख्तियार कर लते है तो वहीँ दुसरे नेता पार्टी छोड़ कर अदला बदली करने में जुट जाते है ओर अपना अपना सुरक्षित जगह बनाने में लग जाते है..वैसे नेताओ का वादा किसी दिन में देखे गए या खुले आँखों से देखे गए सपने से कम नहीं होता है ! ठीक ऐसा ही हाल उत्तर प्रदेश की सियासी जगत में चल रही है जहाँ जब से चुनावों की तारीखें घोषित हुई है तब से सारे राजनीतिक दल अपने अपने वोटरों को लुभाने के लिए नए नए घोषणा पत्र तैयार करने में जुट गए है ..जहाँ एक समय कंप्यूटर का विरोध करने वाली समाजवादी पार्टी को इस चुनाव में कंप्यूटर के रास्ते ही जीत नज़र आ रहा है तो वहीँ दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के घोषणापत्र में इस बार भी राम मंदिर शामिल है ...इन सब के बीच में कांग्रेस के युवराज तो मानो पूरी तैयारी करके उतारे है मैदान में तभी तो उन्होंने कहा की हमें ५ साल दे हम यु.पी का चेहरा बदल देंगे ! वहीँ सूबे की मुखिया को चुनाव आयोग के द्वारा हाथियों की मूर्ति ढंकने का फैसला ही खाए जा रहा है तभी तो चुनाव आयोग को हल्के में लेते हुए बहन जी ने सीधे सीधे कह दिया की खुला हाथी एक लाख का ओर ढंका हाथी सवा लाख का मुखिया का दिया ये बयान उनको भरी पड़ गया ओर चुनाव आयोग ने नसीहत दे डाली की आगे से सोच समझकर बोले ! वही राज्य के छोटे छोटे रूप में उभर कर आ रहे राजनीतिक दल भी बी.एस.पी , सपा , बी.जे.पी और कांग्रेस के लिए काफी सर दर्द के रूप मे बनकर उभर रही है !वहीँ चुनाव आयोग की कडाई के कारण राज्य में लगातार पैसो के बरामदगी का भी सिलसिला जारी है और जिससे इस बात का अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है की ये प्रजातंत्र को कैसे इन नेताओ ने नोट-तंत्र में बदल दिया था!इस बार चुनाव न सिर्फ उत्तर प्रदेश के जनता से जुड़ा है बल्कि कही न कहीं सत्ता में परिवर्तन को लेकर भी कयास लगाया जा रहा है! और राजनीतिक जगत मे एक बहुत पुराना कहावत कहा गया है की दिल्ली का रास्ता यु.पी होकर ही जाता है इसलिए ये कहना गलत नहीं होगा की ये २०१४ लोकसभा चुनावो से पहले ये एक तरह से सेमी-फाईनल है जहाँ पर हर राजनीतिक दल जीत के लिए अपने अपने हथखंडे अपनाने में लगे हुए है और इसी के साथ कांग्रेस के राजकुमार का भी राजनीतिक करियर पूरी तरह यु.पी चुनाव पर टिका हुआ है इसलिए कांग्रेसी कार्यकर्ताओ समेत दिग्गज नेताओ ने राहुल के करियर को बचाने के लिए पूरी प्रयास करते नज़र आ रहे है ! इस चुनावो में कई दिग्गजों के प्रतिष्ठा भी दांव पर है जहाँ एक और ताबड़तोड़ एन.एच.आर.एम घोटाले की जाँच मे लगातार नए नए तथ्य सामने आ रहे है तो वही दूसरी और सरकार और अन्य राजनीतिक दलों के द्वारा लगातार नए नए प्रलोभन जनता के सामने पड़ोसे जा रहे है देखना तो यह होगा की क्या जनता अपने मत का सही प्रयोग करके राज्य को विकास की और मोड़ती है या फिर चुनावी वादों में आकर उलझ कर मात्र रह जाती है ....ये तो अब आने वाला वक़्त ही बताएगा!

फोटो -हिंदी. वन इण्डिया.इन